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2025-26 Predicted and Important | CBSE Class 10th | Hindi B

1. ‘मनुष्यता’ (काव्य) और ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ (गद्य) – [तुलनात्मक प्रश्न]

प्रश्न: ‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने ‘परोपकार’ को सच्ची मनुष्यता माना है, वहीं निदा फाज़ली ने ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ में बढ़ते बाज़ारीकरण और घटती संवेदनशीलता पर चिंता जताई है। इन दोनों पाठों के संदेश को वर्तमान पर्यावरणीय संकट और मानवीय दृष्टिकोण के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए। (5 अंक)

2. ‘तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र’ (गद्य) – [मूल्य आधारित प्रश्न]

प्रश्न: “शैलेंद्र ने फिल्म ‘तीसरी कसम’ को एक व्यावसायिक वस्तु बनाने के बजाय कला की एक शुद्ध कृति बनाए रखा।” इस कथन के आलोक में स्पष्ट कीजिए कि क्या आज के ‘मसाला फिल्म’ के युग में शैलेंद्र जैसे फिल्मकारों के आदर्शों की आवश्यकता है? कलाकार की ईमानदारी और बाज़ारवाद के संघर्ष पर अपने विचार लिखिए। (5 अंक)

3. ‘टोपी शुक्ला’ (संचयन) – [सामाजिक समरसता]

प्रश्न: “टोपी और इफ़्फ़न की दादी का रिश्ता यह सिद्ध करता है कि प्रेम और अपनत्व की कोई भाषा या धर्म नहीं होता।” पाठ की घटनाओं के आधार पर बताइए कि समाज की बनाई दीवारें बच्चों की मासूमियत के आगे कैसे ढह जाती हैं। आज के सांप्रदायिक परिवेश में इस कहानी की क्या सार्थकता है? (4-5 अंक)

4. ‘साखी’ (कबीर) और ‘आत्मत्राण’ (रवींद्रनाथ ठाकुर) – [दार्शनिक प्रश्न]

प्रश्न: जहाँ कबीर अपनी साखियों में ‘अहंकार त्याग’ और ‘ईश्वर के वास्तविक स्वरूप’ पर बल देते हैं, वहीं ‘आत्मत्राण’ कविता में कवि ईश्वर से कष्ट हरने के बजाय ‘कष्ट सहने की शक्ति’ माँगता है। इन दोनों कवियों के भक्ति-दृष्टिकोण में क्या समानता और अंतर है? क्या आधुनिक मनुष्य को ‘आत्मत्राण’ जैसी मानसिक शक्ति की अधिक आवश्यकता है? (5 अंक)

5. ‘कारतूस’ (गद्य) और ‘कर चले हम फ़िदा’ (काव्य) – [देशभक्ति आधारित]

प्रश्न: ‘कारतूस’ के वज़ीर अली का साहस और ‘कर चले हम फ़िदा’ के सैनिकों का आत्मोत्सर्ग एक ही सिक्के के दो पहलू हैं—’मातृभूमि की रक्षा’। इन दोनों पाठों के आधार पर एक सच्चे देशभक्त के गुणों की व्याख्या कीजिए और बताइए कि देश के प्रति युवाओं के क्या कर्तव्य होने चाहिए? (5 अंक)

काव्य खंड (Poetry)

  1. साखी (कबीर): कबीर की साखियों में निहित ‘आचरण की शुद्धता’ और ‘अहंकार के त्याग’ का संदेश आज के अशांत समाज के लिए कितना प्रासंगिक है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
    कबीरदास जी ने अपनी साखियों में कहा है कि मनुष्य का आचरण शुद्ध होना चाहिए और उसे अहंकार छोड़ देना चाहिए। आज समाज में लड़ाई-झगड़े, ईर्ष्या और घमंड बहुत बढ़ गए हैं। अगर लोग सच्चाई, प्रेम और नम्रता अपनाएँ तो समाज में शांति आ सकती है। कबीर कहते हैं कि बड़ा बनने से कुछ नहीं होता, मन साफ होना चाहिए। उदाहरण के लिए, जो व्यक्ति दूसरों की मदद करता है और घमंड नहीं करता, वही सच्चा इंसान है। इसलिए कबीर का संदेश आज भी बहुत उपयोगी और जरूरी है।
  2. पद (मीरा): मीरा की भक्ति में ‘दीनता’ भी है और ‘अधिकार’ भी। ‘ऐरे मह्णाँ नैं चाकर राखा जी’ पद के आधार पर मीरा की भक्ति भावना की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
    मीरा की भक्ति में नम्रता भी है और अधिकार भी। वह खुद को भगवान कृष्ण की दासी मानती हैं, यह उनकी दीनता है। लेकिन साथ ही वे कहती हैं कि कृष्ण पर उनका पूरा अधिकार है, यह उनका प्रेम है। ‘ऐरे मह्णाँ नैं चाकर राखा जी’ पद में मीरा भगवान से विनती करती हैं कि वे उन्हें अपना सेवक बना लें। मीरा संसार की परवाह नहीं करतीं, वे केवल कृष्ण को ही अपना सब कुछ मानती हैं। उनकी भक्ति सच्ची, गहरी और अटूट है।
  3. मनुष्यता (मैथिलीशरण गुप्त): “अखंड आत्मभाव जो असीम विश्व में भरे, वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।” इस पंक्ति के आलोक में सिद्ध कीजिए कि परोपकार ही सच्ची मनुष्यता है।
    कवि कहना चाहते हैं कि सच्चा मनुष्य वही है जो सबको अपना समझे और दूसरों के लिए त्याग करे। जो व्यक्ति केवल अपने बारे में सोचता है, वह सच्चा इंसान नहीं कहलाता। परोपकार यानी दूसरों की मदद करना ही असली मनुष्यता है। जैसे सैनिक देश के लिए अपने प्राण दे देते हैं, डॉक्टर मरीजों की सेवा करते हैं, यह सच्ची मानवता है। अगर हर व्यक्ति दूसरों के दुख को समझे और मदद करे, तो दुनिया बेहतर बन सकती है।
  4. पर्वत प्रदेश में पावस (सुमित्रानंदन पंत): इस कविता में प्रकृति के पल-पल बदलते रूप को ‘जादू के खेल’ जैसा क्यों कहा गया है? ‘ताल’ और ‘शाल के वृक्षों’ के मानवीकरण को स्पष्ट कीजिए।
    इस कविता में प्रकृति के बदलते रूप को जादू के खेल जैसा कहा गया है क्योंकि हर पल दृश्य बदलता रहता है। कभी बादल आते हैं, कभी बारिश होती है, कभी धूप निकलती है। तालाब को ऐसे दिखाया गया है जैसे वह कुछ सोच रहा हो और शाल के वृक्ष ऐसे लगते हैं जैसे वे खड़े होकर पहरा दे रहे हों। यह मानवीकरण है। कवि ने प्रकृति को जीवित रूप में दिखाया है। इससे कविता और सुंदर व रोचक बन जाती है।
  5. तोप (वीरेन डंगवाल): तोप कविता हमें हमारी विरासत (Heritage) के प्रति सचेत रहने के साथ-साथ यह भी बताती है कि ‘अत्याचारी का अंत निश्चित है’। स्पष्ट कीजिए।
    ‘तोप’ कविता हमें अपनी विरासत को सँभालने का संदेश देती है। यह बताती है कि अत्याचारी चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है। बड़ी तोप भी समय के साथ बेकार हो जाती है। इससे पता चलता है कि अन्याय और हिंसा हमेशा नहीं टिकते। हमें अपने इतिहास और धरोहर का सम्मान करना चाहिए। कविता सिखाती है कि सच्चाई और न्याय की जीत होती है और अत्याचार करने वाला अंत में हारता है।
  6. कर चले हम फ़िदा (कैफ़ी आज़मी): एक शहीद सैनिक के मन में अपने देशवासियों के लिए क्या चिंताएँ और अपेक्षाएँ होती हैं? कविता के आधार पर एक सैनिक की मानसिक स्थिति का वर्णन कीजिए।
    इस कविता में एक शहीद सैनिक अपने देशवासियों से कहता है कि अब देश की जिम्मेदारी तुम्हारे हाथ में है। उसे चिंता है कि देश सुरक्षित और मजबूत रहे। वह चाहता है कि लोग आपस में मिल-जुलकर रहें और देश की रक्षा करें। सैनिक गर्व और त्याग की भावना से भरा है। वह अपने प्राण न्यौछावर कर देता है, लेकिन देश की उन्नति की आशा रखता है। उसकी मानसिक स्थिति में देशप्रेम, साहस और कर्तव्य भावना साफ दिखाई देती है।
  7. आत्मत्राण (रवींद्रनाथ ठाकुर): इस कविता में कवि ईश्वर से दुखों को दूर करने की प्रार्थना नहीं करता, बल्कि उनसे लड़ने की शक्ति माँगता है। यह दृष्टिकोण सामान्य प्रार्थनाओं से कैसे भिन्न और श्रेष्ठ है?
    इस कविता में कवि ईश्वर से दुख हटाने की प्रार्थना नहीं करता, बल्कि दुखों से लड़ने की शक्ति माँगता है। यह सामान्य प्रार्थनाओं से अलग है, क्योंकि लोग अक्सर समस्याएँ दूर करने की मांग करते हैं। कवि मानता है कि जीवन में कठिनाइयाँ आएँगी, लेकिन हमें साहस से उनका सामना करना चाहिए। यह सोच हमें मजबूत और आत्मनिर्भर बनाती है। इसलिए यह दृष्टिकोण श्रेष्ठ है, क्योंकि यह व्यक्ति को संघर्ष करने की प्रेरणा देता है।

गद्य खंड (Prose)

  1. तताँरा-वामीरो कथा: रूढ़ियाँ जब बंधन बन जाएँ, तब उनका टूट जाना ही अच्छा है। तताँरा-वामीरो के बलिदान ने अंडमान-निकोबार की सामाजिक सोच में क्या परिवर्तन लाया?
    तताँरा और वामीरो ने पुरानी रूढ़ियों के खिलाफ प्रेम किया और बलिदान दिया। उनके बलिदान से समाज को समझ आया कि गलत परंपराएँ तोड़नी चाहिए। इसके बाद अंडमान-निकोबार में अलग-अलग कबीलों के बीच विवाह की अनुमति मिल गई। लोगों की सोच बदली और वे अधिक खुले विचारों वाले बने। इस कहानी से शिक्षा मिलती है कि जब परंपराएँ बंधन बन जाएँ, तो उन्हें बदलना ही अच्छा होता है।
  2. तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र: फिल्म निर्माण एक व्यावसायिक कार्य है, लेकिन शैलेंद्र ने ‘तीसरी कसम’ के माध्यम से कलात्मक मूल्यों को जीवित रखा। उनके इस संघर्ष और आदर्शों पर टिप्पणी कीजिए।
    फिल्में आमतौर पर पैसे कमाने के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन शैलेंद्र ने ‘तीसरी कसम’ में कला और सच्चाई को महत्व दिया। उन्होंने अच्छी कहानी और भावनाओं को दिखाया। उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा, फिर भी उन्होंने अपने आदर्श नहीं छोड़े। उनका संघर्ष दिखाता है कि सच्ची कला के लिए त्याग करना पड़ता है। वे एक सच्चे कलाकार थे जिन्होंने अपने सिद्धांतों को सबसे ऊपर रखा।
  3. अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले: निदा फ़ाज़ली ने बढ़ती आबादी और पर्यावरण के असंतुलन के बीच जो संबंध बताया है, वह आज के ग्लोबल वार्मिंग के युग में कितना सटीक बैठता है?
    निदा फ़ाज़ली ने बताया कि बढ़ती आबादी और पर्यावरण असंतुलन से संवेदनाएँ कम हो रही हैं। लोग पेड़ काट रहे हैं, प्रदूषण बढ़ रहा है और प्रकृति को नुकसान पहुँच रहा है। आज ग्लोबल वार्मिंग इसका बड़ा उदाहरण है। मौसम बदल रहे हैं और प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ रही हैं। कवि की बात आज पूरी तरह सही साबित होती है। हमें पर्यावरण बचाने और दूसरों के दुख को समझने की जरूरत है।
  4. पतझर में टूटी पत्तियाँ (झेन की देन): आज की ‘भागमभाग’ वाली ज़िंदगी में मानसिक तनाव से बचने के लिए ‘झेन परंपरा’ (टी-सेरेमनी) के माध्यम से लेखक ने क्या समाधान सुझाया है? ‘वर्तमान में जीने’ के महत्व को बताइए।
    लेखक ने झेन परंपरा के माध्यम से सिखाया कि हमें वर्तमान में जीना चाहिए। टी-सेरेमनी में हर काम शांति और ध्यान से किया जाता है। इससे मन शांत होता है और तनाव कम होता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग भविष्य और भूत की चिंता करते रहते हैं। अगर हम वर्तमान क्षण का आनंद लें और ध्यान लगाएँ, तो मानसिक शांति पा सकते हैं। यही लेखक का संदेश है।
  5. कारतूस (एकांकी): वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही था, जिसने अंग्रेजों की नाक में दम कर रखा था। कर्नल के खेमे में घुसकर कारतूस लाने वाली घटना उसके किस साहस और चातुर्य को दर्शाती है?
    वज़ीर अली बहुत साहसी और चतुर था। वह दुश्मनों के बीच जाकर भी नहीं डरता था। कर्नल के खेमे में घुसकर कारतूस लाना उसके साहस और समझदारी को दिखाता है। उसने जोखिम उठाया, लेकिन अपना काम पूरा किया। यह घटना बताती है कि वह निडर, बुद्धिमान और देशभक्त था। वह अपने उद्देश्य के लिए जान की परवाह नहीं करता था।

संचयन (Sanchayan)

  1. हरिहर काका: “रिश्तों की आधारशिला यदि स्वार्थ और जायदाद बन जाए, तो वे बोझ बन जाते हैं।” हरिहर काका के भाइयों और महंत के व्यवहार के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए।
    हरिहर काका के भाइयों और महंत ने उनसे प्रेम नहीं, बल्कि उनकी जमीन से स्वार्थ रखा। जब रिश्तों में लालच और जायदाद आ जाए, तो वे बोझ बन जाते हैं। काका अकेले और दुखी हो गए क्योंकि कोई उन्हें सच्चा स्नेह नहीं देता था। इस कहानी से सीख मिलती है कि रिश्ते प्रेम और विश्वास पर टिके होने चाहिए, न कि धन पर। स्वार्थ रिश्तों को कमजोर बना देता है।
  2. सपनों के-से दिन: लेखक और उनके साथियों की स्कूल की यादें आज के स्कूली जीवन से कैसे भिन्न हैं? पीटी साहब का कठोर अनुशासन और हेडमास्टर साहब की नरमी—इन दोनों में से बच्चों के व्यक्तित्व पर किसका गहरा प्रभाव पड़ता है?
    लेखक के समय में स्कूल का वातावरण सरल और अनुशासित था। आज पढ़ाई का तरीका बदल गया है। पीटी साहब सख्त थे, जिससे बच्चों में अनुशासन आया। हेडमास्टर साहब नरम थे, जिससे बच्चों को स्नेह मिला। दोनों का प्रभाव जरूरी है, लेकिन कठोर अनुशासन बच्चों को जिम्मेदार और मजबूत बनाता है। इसलिए दोनों के गुण मिलकर ही अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।
  3. टोपी शुक्ला: “टोपी और इफ़्फ़न की दादी की आत्मीयता धर्म की दीवारों को नहीं मानती।” क्या आप मानते हैं कि बच्चों का प्रेम जाति-पाँति और धर्म से ऊपर होता है? वर्तमान सामाजिक संदर्भ में उत्तर दीजिए।
    टोपी और इफ़्फ़न की दादी का रिश्ता प्रेम और अपनापन पर आधारित था। वे धर्म की दीवारों को नहीं मानते थे। बच्चे दिल से सच्चे होते हैं, इसलिए वे जाति-पाँति नहीं देखते। आज समाज में धर्म के नाम पर भेदभाव होता है, लेकिन बच्चों का प्रेम हमें सिखाता है कि इंसानियत सबसे बड़ी है। मैं मानता/मानती हूँ कि सच्चा प्रेम धर्म और जाति से ऊपर होता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों (Long Answer Questions) :

1. साखी (कबीर) – अहंकार और मीठी वाणी

प्रश्न: कबीर की साखियों से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर:

  1. कबीर कहते हैं कि हमें हमेशा मीठी वाणी बोलनी चाहिए। इससे सुनने वाले को खुशी मिलती है और हमारा अपना मन भी शांत रहता है।
  2. वे सिखाते हैं कि अहंकार (घमंड) इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है। जब तक मन में ‘मैं’ (घमंड) रहता है, तब तक ईश्वर नहीं मिलते।
  3. कबीर के अनुसार, ईश्वर हमारे मन के अंदर ही हैं, उन्हें बाहर ढूंढना बेकार है।
  4. हमें अपनी बुराई करने वालों (निंदक) को पास रखना चाहिए क्योंकि वे बिना साबुन और पानी के हमारी कमियाँ बताकर हमें साफ (बेहतर) बनाते हैं।

2. मनुष्यता (मैथिलीशरण गुप्त) – परोपकार

प्रश्न: कवि के अनुसार ‘सच्चा मनुष्य’ कौन है?
उत्तर:

  1. सच्चा मनुष्य वही है जो केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जीता और मरता है।
  2. कवि कहते हैं कि हमें परोपकारी होना चाहिए। जिस तरह रंतिदेव और दधीचि ने दूसरों के लिए अपना शरीर तक दान कर दिया, हमें भी त्याग करना सीखना चाहिए।
  3. दुनिया में कोई भी ‘अनाथ’ नहीं है, क्योंकि ईश्वर (अनाथों के नाथ) सबके साथ हैं।
  4. हमें आपस में भाईचारे के साथ रहना चाहिए और एक-दूसरे की मदद करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

3. तीसरी कसम के शिल्पकार: शैलेंद्र

प्रश्न: शैलेंद्र ने अपनी फिल्म ‘तीसरी कसम’ में क्या खास दिखाया है?
उत्तर:

  1. शैलेंद्र एक महान कवि थे। उन्होंने ‘तीसरी कसम’ फिल्म पैसा कमाने के लिए नहीं, बल्कि कला के लिए बनाई थी।
  2. इस फिल्म में उन्होंने गांव की सादगी और एक गाड़ीवान (हीरामन) के पवित्र प्रेम को दिखाया है।
  3. फिल्म में कोई बनावट या दिखावा नहीं है। उन्होंने दुख को बहुत गहराई से दिखाया है।
  4. यह फिल्म हमें सिखाती है कि इंसान को अपनी ईमानदारी और ऊँचे आदर्शों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

4. हरिहर काका (संचयन) – लालच का परिणाम

प्रश्न: हरिहर काका के साथ उनके भाइयों और महंत ने कैसा व्यवहार किया?
उत्तर:

  1. हरिहर काका के भाई और मंदिर के महंत, दोनों ही केवल उनकी जमीन (जायदाद) से प्यार करते थे, काका से नहीं।
  2. शुरू में सबने काका की बहुत सेवा की ताकि वे अपनी जमीन उनके नाम कर दें।
  3. जब काका ने जमीन देने से मना किया, तो उन्हीं भाइयों और महंत ने उन्हें मारा-पीटा और कमरे में बंद कर दिया।
  4. इस कहानी से पता चलता है कि आज के समाज में लोग लालची हो गए हैं और खून के रिश्तों से ज्यादा पैसे को महत्व देते हैं।

5. कर चले हम फ़िदा (कैफ़ी आज़मी) – देशप्रेम

प्रश्न: शहीद सैनिक देशवासियों से क्या उम्मीद करते हैं?
उत्तर:

  1. सैनिक कहते हैं कि उन्होंने अपने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया है।
  2. अब वे देश की जिम्मेदारी हम (देशवासियों) को सौंप कर जा रहे हैं।
  3. उनकी इच्छा है कि देश के लिए कुर्बानी का रास्ता कभी बंद नहीं होना चाहिए।
  4. वे चाहते हैं कि हम अपने देश के सम्मान (हिमालय) को कभी झुकने न दें और हमेशा दुश्मनों से देश को बचाए रखें।
Vandita Tiwari

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