हे नारी, ये छठ तुमको…

हे नारी
क्या इस बार भी छठ
सिर्फ पुत्र के लिए मनानी है?

लड़की होने पर पीरा कम थी?

की बालक होने पर थी अधिक?

जब मां ने तुमसे पूरी पूजा की
थाली सजवाई थी,
और फिर कहा था
चल उठ अब यहां से,
ये थाली तो मैंने आपने पुत्र के लिए लगवाई थी |
क्या तुम्हारा मन नहीं कचोटा था?

आज मन रहा जो छठ है,
उसका क|रण तुम हो|
अगर तुमने न जन्मा होता,
घर का आंगन सुना होता |

तो क्यों भूली हो
अपनी पुत्री और बहू को ?
क्यों हर रही हो सिर्फ
पुत्र के कष्ट?

नई परम्परा ये तुमको शुरू कर|नी है,
लंबी उमर की करो कामना,
मिटालो अपने हर बच्चे के कष्ट |


हे नारी
ये छठ तुमको
पुत्र, पुत्री और बहू के लिए मनानी है|

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